मेरा पहला साल .... कॉलेज..मेरा बेच ..
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जब में पहली बार क्लास गया था ,,,तुम्हारी कसम भाई ,,क्या बताऊ ,,टीचर लोग आकर अंग्रेज़ी में बकबक करे अपनी अंग्रेज़ी पहले से ही जीरो थी ,, तो समझ में क्या खाक आता ,(चूंकि अपन ठहरे हिन्दी भाषी छेत्र के हिन्दी के विद्यार्थी .) पहले दिन टाइम काटने के अलावा कुछ खास नही किया ..समीप में अशोक और नेमी भी मेरी हालत में ही थे .. तो थोडी हिम्मत आई की.. भाई ..अपन यहाँ अकेले नही है ।
धीरे धीरे कोशिश की ..और अपनी अभी यांत्रिकी की यात्रा बस शुरू हो गयी ..
अब सच कहू तो बड़े अजीब टीचर थे । एक थे कौल सर ..पता नही क्या बोलते और क्या पढ़ते थे । ak vyaaas सर तो जो पढाये ,, केवल वो ही जाने । फिजिक्स और सी लैंगुएज के टीचरों ने तो दर्शन ही मुश्किल से देते थे ।
खैर ,,बाकि बेच बड़ा मस्त था । मस्ती के अलावा किसी को और कुछ सूझता नही ।
aieee के नियमानुसार हमारे कॉलेज में तब हर राज्य के लिए सीट्स आरक्षित थी सब लड़के नए तो थे ही ,,अपना अपना एक फ्रेंड सर्कल बना लिए थे ।
मींजी ,सुधीर, संभ्रांत और कुछ अन्य को जैसे क्लास से मतलब ही नही ही होता था । उनकी अपनी ही दुनिया थी ।
कुछ लोग सीसी (one who is ....for a girl ,,this term is very common in my college ) टाइप के भी थे ।
तो कुछ पढाकू भी थे । या यूँ कंहू कि.....किसी आम क्लास की तरह हमारी क्लास भी सब तरह के लोगों से भरी थी ।
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क्लास लेने के मामले मैं बह्पन से ही बड़ा लेट लतीफ़ रहा हूँ । तो ऐसे ही मैं पहले ही दिन फिजिक्स लैब में लेट पहुँचा । अब f2 ( f2 was my sab batch ..actually my batch was further divided in 4 sab batches ) में उस दिन लैब पार्टनर बनाये गए थे ,,तो एक ही लड़की (जयंती:: परिवर्तित नाम) थी ,, और में सबसे लेट था ,,तो वो मेरी लैब पार्टनर बना दी गयी । ..यंहा तक तो कोई खास बात नही..लेकिन मोनी और अनुज जैसे खुराफाती लड़कों ने अपने मन से कुछ बातें बनाकर फैला दी ..और फिर तो क्या आप भी जानते है ..बस लड़को को कोई बकरा मिलना चाहिए आते जाते ,,मुझे जयंती के नाम से बुलाते ,, चिढाते ,,कुल मिला कर मस्ती करते । आज भी उन कमेंट्स को याद कर बस यूँ ही कभी कभी हसी आ जाती है ।
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हमारे यंहा परीक्षा तीन पार्ट्स में होती है .. फर्स्ट मिड टर्म ,,सेकंड मिड टर्म और लास्ट एंडटर्म ।
अब शुरुँआत में तो पढ़े नही( i have told you reason ,,see in start ) ,,तो तत्कालीन भूत के सबसे ख़राब मार्क्स थे । तब तक घर की याद मन से गयी नही थी ,, रागिंग होती थी वो अलग ,,तो सोचा करता था ..अपने गृहनगर में किसी कॉलेज में प्रवेश ले लू ,,और पराये से जयपुर को छोड़ दू ।
किसी तरह से मन लगाया. .अगले मिड टर्म में एक नया नुस्खा हाथ लगा चित्तिंग का ।
श्याम मेरा होस्टल का साथी था । वो और में ,,पेपर होने से पहले ही ,,बोर्ड पर ( हमारे पेपर करीब तीन बाय तीन के लकड़ी के बोर्ड पर होते थे ) जाकर लगभग सारे फोर्मुले आदि लिख देते थे,, बीच पेपर में आंसर भी मिलाते थे ।
एंड टर्म में भी यही कहानी दोहराई । तो बस होना क्या था ,,परिणाम अप्रत्याशित रूप से चोंकाने वाले थे ।
पहले मिड टर्म में बहुत बुरे स्कोर के बावजूद मेरा प्रदशन कुल मिलाकर बहुत अच्छा था ,,nine pointer के रूप में फेमस हुआ और क्लास में चौथा स्थान था। (बड़ा नाटकीय सेम था )।
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दूसरा सेम भी मार्क्स के मामले में ऐसा ही था । दुसरे सेम की खास बात यह थी ..इस सेम में सबसे कम पढ़ाई हुई । क्लास कम होती थी ,,लैब तो हमने ही नही करी . .. कुल मिलाकर बड़ी मस्ती करी ,,और फर्जी सेम था ।
भावना मेम हमारी फिजिक्स की क्लास लेती थी । वो नयी थी ,, अब पहली बात तो ये कि वो जो भी बोले पढाये,,वो सब का सब हमारे उपर से जाए । उपर से खुराफाती बच्चों पर उनका ज़ोर चले नही ।
आगे की दो रो (पंक्तिया )खाली । सब के सब क्लास वाले पीछे आकर बैठ गए ..और फुल मस्ती करे ।
जब कोई उनकी सुने नही,, तो वो में भरी क्लास में फुट फुट कर रो दी । और रोते रोते ,,सिसकिया लेते हुए ,,अपनी व्यथा सुनाने लगी । सब के सब सकते में ,,कि भाई ,,ये क्या हुआ । सही में बड़ी सही घटना थी ,, लेकिन हम मस्तानो पर इस घटना का असर भला कब तक रहता ,, दो दिन तक शांत रहे , फिर वही मस्ती चालू । लेकिन ,,तब तक मेम ने एडजस्ट करना सिख लिया था ।
एक सर थे हाँ याद आया ..मित्तल सर ,, भाई क्या सर थे यार ,,पुरे सेम जब भी उनकी क्लास करी सिर्फ़ और सिर्फ़ एक कम किया ,,नींद निकालने का (हालाँकि वो क्लास में नींद का आनंद उठाने का पहला अनुभव था,, लेकिन अब तो बस जैसे आदत सी हो गयी है )। इसमे उनका भी कोई दोष नही था ,, क्यूंकि दोपहर में खाने के बाद अगर क्लास होगी ,,तो भला लड़के क्या करे ।
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चूँकि ये साल मेरा कॉलेज का पहला साल था ,,कही अनकही ढेरो यादे है । हम साथियो के लिए ये यादे अनमोल धरोहर है ...शब्दों में बयाँ नही की जा सकती ,,बस महसूस की जा सकती है ... ...
Friday, January 2, 2009
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1 comment:
padhkar accha laga ..
..jayanti ka kya hua ..
..tumne mujhe apne college ki yaad dila di ..
likhte rahiye..
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