Monday, December 15, 2008
ये घटना मेरे ग्रुप और साथियों में अभी भी ताज़ा है ।
ये बात २५ जनवरी की सुबह 5 बजे की है । उस समय बहुत ज्यादा सर्दी थी ।
हुआ क्या था कि मेरे 3rd yr बॉस (नीलेश ) को घर जाना था । तो उन्होंने मुझे कहा कि अपन सांगानेर चलते है ,,फिर तू वंहा से बाइक लेकर आ जाना । सर्दी की सुबह साला में आज तक आठ बजे से पहले उठा तक नही और उनके साथ जाऊँ ,,ये मेरा मन कैसे मान ले . लेकिन अब में उन्हें मना तो नही कर सकता था । सो क्या करता ।
अब जब सवा पाँच पर हम वंहा पहुंचे तो बॉस बोले कि भाई ..अब तू इसे ले जाकर हेलमेट और चाबी नवनीत बॉस को दे देना । मेने कहा यस् बॉस ..हो जाएगा ..लेकिन मेने सर्दी की हडबडाहट में पूछा कि बॉस गियर किदर होता है ..बॉस पूछे तू चला तो जाएगा न ... मेने कहा कि हाँ बॉस ॥
अब में बाइक लेकर निकल तो गया ...पर अब रास्ता ढंग से पता नही ..GT की पुलिया के नीचे चला गया । (अब GT तो अलाऊ थी नही ..तो रास्ता कैसे पता होता )॥
अब में पुलिया के नीचे खड़ा सोच रहा कि किधर जाऊं ..पर साली इतने में बाइक बंद ..ठण्ड में मेरे से वो साली बाइक फिर स्टार्ट नही हो होवे ..बॉस ने मुझे पेट्रोल भरवाने की भी कहा था . सो मेने सोचा कि अब करू तो क्या करू। सर्दी की सुबह ..रोड पुरे खाली ..में बाइक गसीट कर ..पहले तो GT तक लाया ..फिर GT के फ्लाई ओवर पर गसीट कर चढाया .(भूलना मत २५ जनवरी की सुबह ५.३० समय था....कैसे बताऊँ भाई ..नासमझी में कैसी हालत हो गयी थी ) .. फिर अर्हिंत के पेट्रोल पम्प पर बीस रुपये का पेट्रोल भरवाया। फिर स्टार्ट कर के हॉस्टल लाया ।
अब सुबह ६ बजे सब लड़के सोये पड़े ..में क्या करू ..मोबाइल और हेलमेट में रूम पर रखकर इधेर उधर घूम रहा और हग्गे में जा के बैठा ॥
नीलेश बॉस ने चाबी और हेलमेट नवनीत बॉस को देने की कहा था । लेकिन सात बजे तक मेने कोई संपर्क नही किया । तो बॉस लोगो में खलबलि मच गयी कि आख़िर छोरा ..साला गया किधर..कंही कोई दुर्घटना तो नही हो गयी । अब जबकि मेने ये पूछा कि गियर किधेर होता है तों चिंता होना स्वभाविक ही था । तो पहले तो वो लोग मुझे कॉल करे ....मैं बाहर घूम रहा ..फ़ोन रूम के अन्दर ..में फ़ोन उठाऊ नही .. वो सब परेशान ।
अब वो रूम पर मुझे देखने आए तों में हग्गे में बैठा ,,आराम फरमा रहा था ..अब जब फिर में रूम पर नही मिला,,रूम मेट को कुछ पता नही था तों वो लोग भयंकर परेशान... दो बाइक ली और मुझे खोजने निकल पड़े...इसी बीच कुछ देर बाद जब में हग्गे से निकला तों बड़ा अच्छा सीन बन गया ...में रूम पर गया तों नवनीत बॉस वंहा बैठे ..मेने कहा कि बॉस आपने क्यों परेशान हुए ..में तों आपको चाबी देने आ ही रहा था । वो पूछे कि तों भाई मेरे ..देने क्यों नही आया । में बोला कि बॉस ..सुबह ६ बजे आपको क्या जगाता ..थोडी देर बाद दे दूंगा।
अब वो पूछे कि फ़ोन क्यों नही ले गया ..मेने कहा बॉस..क्या आप हग्गे में फ़ोन ले जाते है ।
वो काफी परेशान हो गए थे ,,वो मुझे गलिया दे .और में मंद मंद हसू।
मेरे इस रवैये से वो बिफर गए.. और मुझे बोला कि सारे ग्रुप को बुला कर ८ बजे रूम पर मिलना . .. जब रिम पर गए तों झल्लाते हुए बोले ..हरामखोरों *****--****--***बहुत झेल लिया तुम्हे..परशान कर के रख दिया है ..समझ नही आ रहा है ..तुम हमारी रैगिंग ले रहे हो या तुम हमारी ..कितने पैसे चहिये ..ये लो चार हज़ार ..और कर लो ,,ख़ुद ही फ्रेशर ..कम है तों और ले लो ..लेकिन हमे माफ़ करो । हमने काफी मिन्नते करी.. तब जाकर मामला कुछ शांत हुआ॥
इस घटना के पीछे मूल कारन ..मेरा हगा और मेरी हँसी थी ..जिससे ग्रुप में हड़कंप मच गया था ॥
आज जबकि नीलेश और नवनीत बॉस पासआउट हो चुके है ... फिर भी ये घटना मेरे ग्रुप में ताज़ा है ..और इसे
याद कर के सब हसते है॥
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6 comments:
hmmm..
matlab kuch bhi psot akrte phirte ho.
..
phir bhi thik hai
good keep it up
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laxman suthar
udaipur
achchha likha hai.adhik se adhik likhane se hi riyaj hota hai.tabhi achchhe lekhak janm lete hai.
likho khoob likho.
laxaman ji aapse baat karna chaunga ..
apni id dejiyega..
..
bahadur ji aapke smarthan ke liye dhanyawad..
..ankur
First of all Wish U Happy New Yewr..
Sundear Rachana...
Badhi...
kash mere saath bhi ho asa to me bhi apne commetns section ko bada saku
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