(पाठकों की प्रितिक्रिया प्रिरित करती है ,,आपके बहुम्ल्या सुझाव तथा संदेशों की प्रतीक्षामे)..एक आग्रह ह की पहले नीचे वाला पोस्ट पढ़े..
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लेकिन इस ज्ञान का मुझे ज्यादा फायदा नही हुआ ,, क्योंकि अगली बार फिर मेने कटवाया ,,अगले साल ब्लित्ज्लग में नाम से एक लड़की हमारी इवेंट हेड थी और बाड़ी और देव मेरे साथ थे ..अब महारानी जी इवेंट से एक दिन पहले फ़ोन करके बोले की,,यार देव कल में इवेंट में नहीं आ पाऊँगी ,,हमने पूछा ,,क्यों,, ऐसा क्या हुआ ,, तो बोले की,, यार घर जाना है ,,और वो अभी तक किसी जज को अप्प्रोच भी नहीं किया है ..
हमने सोचा उसे कोई जरुरी प्रॉब्लम होगी,,ठीक है .. हमने भाई सुबह तक दो प्रोफेस्सेरको जज बन्ने के लिए राजी कर लिया .. जब हमने उसे ये बात फ़ोन करके बताई ,,तो महारानी swati g हाजिर ,,(कल को महारानी swati g को घर जाना था ,, और अब पुरे दिन हमारे साथ ,,ऐसी भी क्या ही फटती है यार ).. हम भी क्या कहते ,,शांति से इवेंट खतम हो गया..
भाई समय बिता ,, और दुसरे इवेंट के भाई लोग को certis मिल गए .. मेने देव ,,और बाडी ने महारानी swati g ( जबरदस्ती की इवेंट हेड )को अप्प्रोच किया ,, तो उन्होंने हमे पहचानने से इंकार दिया ,, जो रेस्पोंसे दिया साहब मेरे हिसाब से बिलकुल भी मुनासिफ नहीं था,, भगवन बचाए ऐसी ****लड़कियों से .. बड़ी और मुझे ऐसे रेस्पोंस से शोक लगा ,,अब किसी की चाटने की आदत तो हमारी थी नहीं ,,मन मसोस के रह गए,, कुल मिलकर हमारा तगड़ा वाला कटा ..(कसम भवानी की ,, इन महारानी को तो आज भी एक आधा ज़माने का मन करता है ..
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पहले साल dramatics में कटवाने के बाद फिर मेने dramtics में बाडी और अखिल के साथ,, स्टेज कमिटी को ज्वाइन किया ,,इसमें हमने नेहा जी और वैदेही जी के निर्देश में हमने अपने हाटों से थर्माकोल ,,फेविकोल से स्टेज बनाया ,,साथ में १सत यर से लव शिवानी ,,और हमारे इयर की सिविल की २ लड़कियां थी ..हंसी मजाक के साथ कम किया .. बहुत ही प्यारा अनुभव था ..बोले तो दिल गार्डन गार्डन हो गया था .. नेहा जी ,,शिवानी आदि रेस्पोंस अच्छा था ..लेकिन हमारेइयर की सिविल की लड़कियां ..समे .. जहाँ swati g महारानी थी ,,तो ये भी किसी ठकूराइन से कम नहीं थी ..
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जब इवेंट चल रहा था,,तो रात को मौसम ने अपना तांडव दिखाया ,,तेज बारिश और आंधी ने हमारे हस्तनिर्मित स्टेज का अस्तित्व को ही संकट में डाल दिया था .. कुल्हादिया जी और साथियों के प्रयासों से इन आपातकालीन परिस्थितियों में हमने स्टेज को धराशायी होने से बचा लिया ..( यार अपने हाथ से बनाई हुए सामान अमूल्य होते है ,,इस बात से तो सभी सहमत होते है ,,तो ऐसे कैसे हम स्टेज को टूटने देते )..
उसी समय ,,प्रोफेस्सेर लोगो की परिवार सहित पार्टी चल रही थी ,, कुल्हादिया जी ने हमे उस भोज में शामिल करवाया ,, और हमने भीगे कपड़ो में उस दावत का भरपूर लुत्फ़ उठाया ,, राम कसम क्या आइस क्रीम थी ,,शायद १० से ज्यादा कटोरी खाई होंगी ,,लाजवाब .. क्या दिन था यार पहले तो "हस्त न्रिमित स्टेज "को बचाया ,,फिर इस लजीज दावत का लुत्फ़ ,, सुबहाँअल्ला..
3rd यर में यंहा के सिस्टम को समझ गया था ,, सो ब्लित्ज्लग नयूरों सरीखे इवेंट्स में बिना किसी खास प्रयास के ४-५ सर्तिएस जुगाडे .. और बाडी इस साल दो फेस्ट का हेड बना है..२नद यर के बाद इन फेस्ट में कमोबेश सभी का मन हट जाता है ..
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इसी तरीके ये इवेंट अपने कॉलेज के सीसी ,, नॉन सीसी,,डांसर,,प्लेयर ,,एक्टर ,, सबका मनोरंजन करते रहे ..इसी उम्मीद में ..
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Monday, May 4, 2009
EVEN SEM BOLE TO FESTY SEM
जब भी एक्जाम्स ख़तम होते है ,, अगली ४-५ राते भटकते हुए गुजरती है ,, में और मोनू ,, सुबह जब उजाला होने लगता है ,,मस्ती भरी ठंडी ठंडी पुरवाई चलती है ,,तब जाकर सोचते है की चलो अब सो लिया जाए ..खैर..
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इवन सेम में कॉलेज में MST,, Blitzlag ,,ताल सरीखे इवेंट होते रहते है ,,जिससे नाचने कूदने वाले ,,और उनको देखने वाले दीवानों का मन लगा रहता है ..तो सबसे पहले Blitzlag से सामना हुआ ,, इधर उधर पार्ट लिया ,, किसी के २nd तो किसी इवेंट के 3rd राउंड में पहुंचे ,, लेकिन सीनियर के कृपा रहते जीते नहीं ..
फिर MST का
आयोजन हुआ .. राम कसम ,,चिंटू केे अंकल,,मस्त इवेंट था .. badminton tennis volleyball के मैच देखे ..लेकिन सबसे ज्यादा मजा Girls Basketball में आया ,,क्या समा क्या माहौल था ,,बोले तो झक्कास ..(आप भावनाओं को समझ रहे हो न )..उस समय ये स्लोगन काफी फेमसहुआ था,,"अन्ना कुरकुरे मनार कुरकुरे ,, diskyoun diskyoun diskyoun)...
..(this pic is of MST grls basketball)..
फिर dramatics आया ,,मुझे कॉलेज के सिस्टम की अधिक जानकारी तो नही थी ,,तो सर्तिफिकाते के लालच में बस वोलेंतिएर बन गया ,,और स्टेज के पीछ्हे सजी धजी लड़कियों और लड़को को भी माइक दे रहा था ,, थोडा बहुत काम भी किया ,,पर इसी छकर में हमारी मेस का खानाछुट गया ..में और साहिल (दोनों १स यर )साथ में थे(११:३०पम),,अब क्या किया जाये ,,बस आक्नको में खाने
के सपने लिए ,,भास्कर के रह पर हम चल तो दिए ..लेकिन भूखा पेट तनहा सफ़र था .. दूर दूर तक किसी ढाबा या तड़ी का नमो निशान नही था ..
सरस उस दिन बदकिस्मती से बंद था ..तो बस गौरव तावेर की तरफ चल दिए ..वंहा का नजारा तो और भी वीभत्स था ,,दुकाने बंद पड़ी थी ,,खुदा की रहमत से हमे एक भेलपुरी वाला अपने सामान समाते हुए दिखा ,,बस होना क्या था ,, गए और कुत्तों की तरह भेलपुरी पर टूट पड़े ,, साहब भेलपुरी तो आपने भी बहुत खाए होगी ,,लेकिन जो स्वाद जो शांति जो आनंद की अनुभूति हमे हुयी थी ,,वो शायद ही आपको कभी हुए होगी..
लेकिन बाद में मेरा कट गया ,, मुझ 1st यर को कोई certi नही मिला ..तब मुझे यंहा केे सिस्टम का हल्का हल्का
ज्ञान हुआ ..
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इवन सेम में कॉलेज में MST,, Blitzlag ,,ताल सरीखे इवेंट होते रहते है ,,जिससे नाचने कूदने वाले ,,और उनको देखने वाले दीवानों का मन लगा रहता है ..तो सबसे पहले Blitzlag से सामना हुआ ,, इधर उधर पार्ट लिया ,, किसी के २nd तो किसी इवेंट के 3rd राउंड में पहुंचे ,, लेकिन सीनियर के कृपा रहते जीते नहीं ..
फिर MST का
आयोजन हुआ .. राम कसम ,,चिंटू केे अंकल,,मस्त इवेंट था .. badminton tennis volleyball के मैच देखे ..लेकिन सबसे ज्यादा मजा Girls Basketball में आया ,,क्या समा क्या माहौल था ,,बोले तो झक्कास ..(आप भावनाओं को समझ रहे हो न )..उस समय ये स्लोगन काफी फेमसहुआ था,,"अन्ना कुरकुरे मनार कुरकुरे ,, diskyoun diskyoun diskyoun).....(this pic is of MST grls basketball)..
फिर dramatics आया ,,मुझे कॉलेज के सिस्टम की अधिक जानकारी तो नही थी ,,तो सर्तिफिकाते के लालच में बस वोलेंतिएर बन गया ,,और स्टेज के पीछ्हे सजी धजी लड़कियों और लड़को को भी माइक दे रहा था ,, थोडा बहुत काम भी किया ,,पर इसी छकर में हमारी मेस का खानाछुट गया ..में और साहिल (दोनों १स यर )साथ में थे(११:३०पम),,अब क्या किया जाये ,,बस आक्नको में खाने
के सपने लिए ,,भास्कर के रह पर हम चल तो दिए ..लेकिन भूखा पेट तनहा सफ़र था .. दूर दूर तक किसी ढाबा या तड़ी का नमो निशान नही था ..
सरस उस दिन बदकिस्मती से बंद था ..तो बस गौरव तावेर की तरफ चल दिए ..वंहा का नजारा तो और भी वीभत्स था ,,दुकाने बंद पड़ी थी ,,खुदा की रहमत से हमे एक भेलपुरी वाला अपने सामान समाते हुए दिखा ,,बस होना क्या था ,, गए और कुत्तों की तरह भेलपुरी पर टूट पड़े ,, साहब भेलपुरी तो आपने भी बहुत खाए होगी ,,लेकिन जो स्वाद जो शांति जो आनंद की अनुभूति हमे हुयी थी ,,वो शायद ही आपको कभी हुए होगी..
लेकिन बाद में मेरा कट गया ,, मुझ 1st यर को कोई certi नही मिला ..तब मुझे यंहा केे सिस्टम का हल्का हल्का
ज्ञान हुआ ..
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Saturday, May 2, 2009
GMP .:: कल आज और हमेशा ..
तो भाई लोगों क्या हाल है ,,आज मेरे 6th सेम के एक्जाम्स ख़तम हो गए है ..अभी अभी मूवी ख़तम
करी है ..सुबह के 5 बज रहे है ..
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अब में कॉलेज की बात करू ,,और GMP की बात न करू तो ,,ये तो बेमानी ही होगी ना.. GMP हमेशा से हमारे कॉलेज लाइफ का अभिन्न हिस्सा रही है और रहेगी .. तो GMP ,,मतलब तो आप जानते ही होंगे ..जब हम लोग फर्स्ट इयर में नए नए आये थे ,,
GMP हमारे लिए मना थी .. लेकिन बॉस लोग हमे कभी कभी वहां बुला लिया करते थे ..
अब इसे ही एक दिन मंत्री ,,मेद्त्व्ल बॉस ने 3rd यर से मिलाने की लिए GMP पर बुलाया था .
बॉस लोगो ने हमारी लेना चालू किया .. थोडी देर बाद क्या हुआ ,, अपने वीजानिया सर एंटी रेगिंग की गाड़ी लेकर आ धमाके ,, बॉस ने हमे कूल होने के लिए कहा..
. लेकिन सर को तो शक हो ही गया था ,,तो उन्होंने मेद्त्व्ल और प्रतीक बॉस को धर लिया ,,हमको भी बुला लिया और पूछा ,, की ये तुम्हे परेशां कर रहे थे क्या ?
हमने कुछ नही कहा .. सर ने बॉस लोगो को खूब हड़काया धमकाया ,,दो चार जमा भी दिए ,,बोले तो .....full.... ले ली ..तो इस तरह मेरा GMP से मेरी पहली पहचान हुई ..
स्टार्टिंग में GMP हमारे (1st यर) के लिए बेन थी तो कैसे जाते ..
कभी कभी चोरी छिपे मन में दर लिए ही जाते थे ,, तो ऐसे ही एक बार में गया हुआ था ,,बॉस आ धमके ..
ेमुझेे खोपच ेमें ले गए,, उसके बाद जो *** हुआ ,, उसे में यंहा नही बता सकता ..
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2nd यर में हम लोग को 7 no. हॉस्टल अलोट हुआ था ,,साउथ अफ्रीका में २० २० वर्ल्ड कप हो रहा था ,, अब मेरे हॉस्टल में तो टीवी चले नही ,,इंडिया की टीम पेलम फोडे ,,अब हम लोग क्या करे GMP ही हमारा सहारा थी ..
अब GMP पर कुर्सिया लिमिटेड रहती है और दीवार पर भी गिनती के लोग ही बैठ सकते है ..तो स्टार्ट्स के मैचों में हमारा कटा (में और घनशयाम साथ में जाते थे )..तो हमने सोचा की यार,,, खड़ेखड़े तो मैच नही देखे जा सकते ,,क्या करे ..
फिर हम क्या करते थे की ,,जल्दी ८ बजे खाना खाते ,,और मैच शुरू होने के आधे घंटे पहले जी जाकर बैठ जाते ..और फिर वंहा शान से दीवार पर बैठ कर दुसरे लोगो को बैठने की जगह के लिए कोशिश करते ,,लड़ते झगड़ते देखते ,,साथ में इंडिया की पेलम जीतो का मज़ा उठाते ..
पाकिस्तान के खिलाफ बोवल आउट ने समां बाँध दिया था ..फिर आखिर के मत्चो में घंटे भर पहले जाकर बैठ जाते थे ,,युवराज की ६ सिक्स्स वाली फिफ्टी और मिस्बा के खिलाफ जोगिन्दर का आखिरी ओवर ,,,यार भाई क्या बताऊँ ,,इनता आनंद तो जीवन में कभी कभी ही मिलता है ..
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3rd yr में मुझे २ no अलोट हुआ ,, शाम को जब कभी क्लास से आते तो लगभग पूरी क्लास वाले GMP जाते ,,जेब में पैसे होते तो दुसरे साथी भी मॉल डा जाते थे ..
तो मोनू और मेने सोचा यार भाई ये तो कुछ ज्यादा ही हो रहा है ..अब हम लोग क्या करते ,,नंगी जेब जाते ,,दुसरो से पैसे ले लेकर फ्री का मॉल खाते ,,फ्री की आदत लग गई तो आसानी से छुटी नही ,, अलग अलग लोगो से चार आना ,,आठ आना मांग मांग कर ,, रोज़ २०-३० जोड़ कर ऐश करते ..
लगभग महीने भर तक यही किया,,३०-४० लोगो से मांग लिया ..साब ,, चाहे कुछ भी कहो ,,इस तरह जो खाया ,,उसका स्वाद ही कुछ और था..
इस बार क्या हुआ ग्रुप में जूनियर कुछ ज्यादा आ गए ,,६थ सेम के एंड में जब उनकी फ्रेशेर हुई ,,तो उसके बाद वो हम सेनिओर्स को कुत्तो की तरह तलाश करते ,,और जब भी कोई सीनियर सरस GMP तड़ी कॉलेज कैंटीन एवें रोड पर भी दीखता ,,उसका बट्टा बिठा देते .. में भी कई( कुछ ज्यादा ही) बार बकरा बना ..
लगता है ,,5th सेम में मेने जो किया ,,उसका हिसाब भगवन ने मुझसे 6th सेम में चुकता करवा दिया ..
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GMP आज भी है ,,कल भी रहेगी ,,GMP वाले मोटे भैया ,, वही अपने पञ्जाबी गाने सुनते रहंगे ,,छोरों को पकाते रहेगे..
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जारी है..
Friday, May 1, 2009
GMP .:: kal aaj aur kal
To bhai logon kya haal hai ,,
Aaj mere 6 th sem ke exams khatam ho gaye hai ..Abhi abhi movie khatam
kari hai ..Subah ke 5 baj rahe hai ..
..
Ab me college ki baat karu ,,aur GMP ki baat na karu to ,,ye to bemani hi hogi na ..
To sab GMP ,,matlab to aap jante hi honge ..
Jab hum log first year me naye naye aaye the ,, Gmp hamare liye mana thi .. Lekin Boss log hume vanha kabhi kabhi vahan bula liya karte the ..
Ab ese hi ek din Mntri ,,Mdatwal boss ne third yr se milane ki liye GMP par bulaya tha . Boss logo ne hamari lena chalu kiya .. Thodi der baad kya hua ,, apne v janiya sir anti ranging ki gadi lekar aa dhamake ,, boss ne hume cool hone ke liye kaha ..
. Lekin sir ko to shak ho hi gaya tha ,,to unhone medtwl aur prtik boss ko dhar liya ,,humko bhi bula liya aur pucha ,, ki ye tumhe pareshan kar rhe the kya ?
Humne kuch nhi kha .. Sir ne boss logo ko khub hadkaya dhamkaya ,,do char jama bhi diye ,,bole to full le li ..To is tarah mera GMP se meri pahli pahchan hui ..
Starting me GMP hamare (1st yr) ke liye ban thi to kaise jaate ..
Kabhi kabhi chori chipe man me dar liye hi jaate the ,, to aise hi ek baar me gaya hua tha ,,boss aa dhamke ..
MUjhe kopache me le gaye,, uske baad jo *** hua ,, use me ynha nhi bata sakta ..
..
Ab smaya ke saath 2nd sem aaya ,,MST BLITZLAG sarikhe event bhi ho huye,, lekin bhai hamari fresher nhi hui thi .
Me 2 no hostel me rhata hta ..Ab jin groups ki fresher ho gai thi,,unse GMP se saman manga manga kar khate the .. Aise khane me pelam maza aata tha ..
..
Ab jab hamari fresher ho gai thi ,,to hum khud to sham ko vnha jakar khate hi the ,,jab kabhi koi boss dikhe ,,unhe pakad kar unki jab dhili karte ,, khub treats li ,,bhai pelam maja aata tha ..
..
2nd yr me hum log ko 7 no hostel allot hua tha ,,South Africa me 20 20 world cup ho rha tha ,, ab mere hostel me to TV chale nhi ,,INDIA ki team pelam phode ,,ab hum log kya kare GMP hi hamara sahara thi ..
Ab GMP par kursiya limited rahti hai aur deewar par bhi ginti ke log hi baith sakte hai ..To starts ke matches me hamara kta (me aur Ghanshayam sath me jaate the )..TO humne socha ki yaar,,,kadhe kahde to match nhi dekhe ja sakte ,,kya kare ..
Phir hum kya karte the ki ,,jaldi 8 baje khana khate ,,aur match shuru hone ke aadhe ghante pahle ji jaakr baith jate ..Aur phir vnha shan se deewar par baith kar dusre logo ko baithne ki jagah ke liye kosish karte ,,ladte jhagdte dekhte ,,saath me INDIA ki pelam jeeto ka maza uthate ..
Pakistan ke khilaf bowl out ne sama baandh diya tha ..PHir aakhir ke matcho me ghante bhar pahle jaakar baith jaate the ,,Yuvraj ki 6 sixs wali fifty aur Misba ke khilaf Joginder ka aakhiri over ,,,yaar bhai kya bataun ,,inta aanand to laife me kabhi kabhi hi milta hai ..
..
3rd me mujhe 2 no allot hua ,, sham ko jab kabhi class se aate to lagbhag puri class wale GMP jaate ,,jeb me paise hote to dusre saathi bhi mal uda jaate the ..
To Monu aur mene socha yaar bhai ye to kuch jyada hi ho rha hai ..Ab hum log kya karte ,,nangi jeb jaate ,,dusro se paise le lekar free ka mal khate ,,free ki aadat lag gai to aasani se chuti nhi ,, alag alag logo se char aana ,,aath aana mang mang kar ,, roz 20-30 jod kar aish karte ..
Lagbhag mahine bhar tak yahi kiya,,30-40 logo se mang liya ..Saab ,, chahe kuch bhi kaho ,,is tarah jo khaya ,,uska swad hi kuch aur tha..
Is baar kya hua group me junior kuch jyada aa gaye ,,6th sem ke end me jab unki fresher hui ,,to uske baad wo hum seniors ko kutto ki tarah talash karte ,,aur jab bhi koi senior SARAS GMP THADI COLLEGE CANTEEN even road par bhi dikhta ,,uska batta bitha dete .. Me bhi kai( kuch jyada hi) baar bakra bana ..
Lagta hai ,,5th sem me mene jo kiya ,,uska hisab Bhagwan ne mujhse 6th sem me chukta karwa diya ..
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jaari hai..
Aaj mere 6 th sem ke exams khatam ho gaye hai ..Abhi abhi movie khatam
kari hai ..Subah ke 5 baj rahe hai ..
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Ab me college ki baat karu ,,aur GMP ki baat na karu to ,,ye to bemani hi hogi na ..
To sab GMP ,,matlab to aap jante hi honge ..
Jab hum log first year me naye naye aaye the ,, Gmp hamare liye mana thi .. Lekin Boss log hume vanha kabhi kabhi vahan bula liya karte the ..
Ab ese hi ek din Mntri ,,Mdatwal boss ne third yr se milane ki liye GMP par bulaya tha . Boss logo ne hamari lena chalu kiya .. Thodi der baad kya hua ,, apne v janiya sir anti ranging ki gadi lekar aa dhamake ,, boss ne hume cool hone ke liye kaha ..
. Lekin sir ko to shak ho hi gaya tha ,,to unhone medtwl aur prtik boss ko dhar liya ,,humko bhi bula liya aur pucha ,, ki ye tumhe pareshan kar rhe the kya ?
Humne kuch nhi kha .. Sir ne boss logo ko khub hadkaya dhamkaya ,,do char jama bhi diye ,,bole to full le li ..To is tarah mera GMP se meri pahli pahchan hui ..
Starting me GMP hamare (1st yr) ke liye ban thi to kaise jaate ..
Kabhi kabhi chori chipe man me dar liye hi jaate the ,, to aise hi ek baar me gaya hua tha ,,boss aa dhamke ..
MUjhe kopache me le gaye,, uske baad jo *** hua ,, use me ynha nhi bata sakta ..
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Ab smaya ke saath 2nd sem aaya ,,MST BLITZLAG sarikhe event bhi ho huye,, lekin bhai hamari fresher nhi hui thi .
Me 2 no hostel me rhata hta ..Ab jin groups ki fresher ho gai thi,,unse GMP se saman manga manga kar khate the .. Aise khane me pelam maza aata tha ..
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Ab jab hamari fresher ho gai thi ,,to hum khud to sham ko vnha jakar khate hi the ,,jab kabhi koi boss dikhe ,,unhe pakad kar unki jab dhili karte ,, khub treats li ,,bhai pelam maja aata tha ..
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2nd yr me hum log ko 7 no hostel allot hua tha ,,South Africa me 20 20 world cup ho rha tha ,, ab mere hostel me to TV chale nhi ,,INDIA ki team pelam phode ,,ab hum log kya kare GMP hi hamara sahara thi ..
Ab GMP par kursiya limited rahti hai aur deewar par bhi ginti ke log hi baith sakte hai ..To starts ke matches me hamara kta (me aur Ghanshayam sath me jaate the )..TO humne socha ki yaar,,,kadhe kahde to match nhi dekhe ja sakte ,,kya kare ..
Phir hum kya karte the ki ,,jaldi 8 baje khana khate ,,aur match shuru hone ke aadhe ghante pahle ji jaakr baith jate ..Aur phir vnha shan se deewar par baith kar dusre logo ko baithne ki jagah ke liye kosish karte ,,ladte jhagdte dekhte ,,saath me INDIA ki pelam jeeto ka maza uthate ..
Pakistan ke khilaf bowl out ne sama baandh diya tha ..PHir aakhir ke matcho me ghante bhar pahle jaakar baith jaate the ,,Yuvraj ki 6 sixs wali fifty aur Misba ke khilaf Joginder ka aakhiri over ,,,yaar bhai kya bataun ,,inta aanand to laife me kabhi kabhi hi milta hai ..
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3rd me mujhe 2 no allot hua ,, sham ko jab kabhi class se aate to lagbhag puri class wale GMP jaate ,,jeb me paise hote to dusre saathi bhi mal uda jaate the ..
To Monu aur mene socha yaar bhai ye to kuch jyada hi ho rha hai ..Ab hum log kya karte ,,nangi jeb jaate ,,dusro se paise le lekar free ka mal khate ,,free ki aadat lag gai to aasani se chuti nhi ,, alag alag logo se char aana ,,aath aana mang mang kar ,, roz 20-30 jod kar aish karte ..
Lagbhag mahine bhar tak yahi kiya,,30-40 logo se mang liya ..Saab ,, chahe kuch bhi kaho ,,is tarah jo khaya ,,uska swad hi kuch aur tha..
Is baar kya hua group me junior kuch jyada aa gaye ,,6th sem ke end me jab unki fresher hui ,,to uske baad wo hum seniors ko kutto ki tarah talash karte ,,aur jab bhi koi senior SARAS GMP THADI COLLEGE CANTEEN even road par bhi dikhta ,,uska batta bitha dete .. Me bhi kai( kuch jyada hi) baar bakra bana ..
Lagta hai ,,5th sem me mene jo kiya ,,uska hisab Bhagwan ne mujhse 6th sem me chukta karwa diya ..
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jaari hai..
Saturday, January 17, 2009
मकर संक्रान्ति(3rdyr ) :;मस्ती भरा एक सुखद दिन
तो भाई ,,जैसा कि मैं बता चुका हूँ ,,मैं पतंगो के पीछे बचपन से ही क्रेजी रहा हूँ और मेरी पांचवी क्लास में 24 डिसेम्बर को छत से गिरकर एक बार हाथ भी तुड़वा चुका हूँ ।
तो इस बार कॉलेज में हर साल की तरह छुट्टी थी। सुबह दस बजे करीब उठा । अब चूँकि सात नंबर में इतना अच्छा माहोल में पिछले साल ही देख चुका था ,,और दो नंबर में वैसा मज़ा नही देखा था ,,तो देर से उठा था ।
अब जब सुबह उठा तो देखा कि सामने 2ND इयर ब्लाक से कोटा ग्रुप के मंत्री ,अभय ,,और कुछ अन्य लड़के पतंग उडा रहे थे । तब मेरे पड़ोसी प्रदीप (खेरला दौसा),,ने कहा यार ,,कहा कि यार ,, अंकुर अपन भी पतंग उडाते है । मेने कहा ..ठीक है भाई ,,इसमे क्या बुराई । लेकिन पतंग लाये कहाँ से ।
मेने कहा ,,चल कालोनी में दस दस रुपये मांगते है ,,और लेके आते है । उसने कहा ,,चल ठीक है ।
सबसे पहले , में सुभी के पास गया । पहले तो आनकानी करी । तब फिर मयूर ,,मेरे और प्रदीप के दवाब में उसने रुपये दे दिए । अब मित्तल ,,लम्बू ,,मनोज से हाथो हाथ पैसे लिए ,,और दो जूनियर को बुलवाया ।
तब तक अजय और हेमंत भी मेरे रूम पर आ गए । १०० रुपए कलेक्ट हो गए थे। अब जूनियर शकल से ***लग रहे थे ।
मेने कहा ..भाई ,,में इनके साथ जा रहा हूँ। भला इसमे किसी को क्या आपति हो सकती थी ।
..
अब हम बेक गेट गए । सारी दुकाने देखू ,,पर साली पत्नाग कंही दिखाई नही दे ।डाउट हो रहा था कि कही साली *** **** पतंग कंही मिलेगी भी या नही ।
मेने जुनिओरो को कहा ,,यार भलाई के चक्कर में बुरे फंसे ,,चलो सत्कार चलो ।
अब इसी बीच रोड पर पतंग लुट रहे बच्चो से पतंग खरीदने कि कोशिश करे । हालत ये थी कि एक भी छोरा देने को तैयार नही । बड़ी मुश्किल से ,, छोरे ने तीन रुपये में तीन पतंग दी । लगा असे जैसे जंग जित ली हो ।
अब सत्कार में जूस वाला साला ,,(अरे डोसा वाले के सामने ) डोर बच रहा था . मेने चालीस रुपये की डोर खरीद कर एक जूनियर को पकडाई । अब पतंगे वंहा नही मिली । अब मैं जुनिओरो को साफ़ साफ़ अल्टीमेटम दिया ,,कैसे भी करके ,,रोड पर लुट रहे चोरो से या ,,ख़ुद लुट कर कम से कम दस पतंग लाकर दो ।
सही कह रहा हूँ ,,भाई ,,भारी किल्लत थी । भला हो ,,जुनिओरो का जो छोरो को पकड़ पकड़ कर,,भाग भाग कर ,, पतंग लाकर दी ।
अब तक 53 रुपए खर्च हो चुके थे । मेने कहा भाई ,,चलो तुम्हारे समोसे बनते है । (दरअसल ,,में ख़ुद दस बजे उठा ,,मतलब कि नाश्ता नही किया ,,समय साधे बारह हो रहा था ,,मुझे ख़ुद को भूख लग रही थी )। समोसे खाकर ,,हम कॉलेज आ गए ।
..
अब् हमने 70 रुपए बताये । ३० रुपए बाकि थे । अब मयूर खाने पीने का शोकिन है । इवन PJ मेम भी उसे कचोरी बुलाती है । वो बोला ,,यार समोसे मंगाते है । मुझे बुरा भला प्रदीप से बीस रुपए लेकर मनोज ने एक जूनियर को तो साइकल से समोसे लाने के लिए भेज दिया ,,तो दुसरे को डोर लपटने के लिए खडा कर दिया ।
साला एसा ***** था कि ,,साले ने कभी अपनी जिन्दगी में पतंग नही उडाई थी । बस ,,समझ लो उसका तो काम हो गया ।
इसी बीच मनोज मित्तल प्रदीप मेस गए । में सुभी तायल और मयूर बेसब्री से समोसे का इंतज़ार कर रहे थे । जैसे समोसे आए ।जुनिओरो को भगा दिया हम चारो दो दो समोसे उडा गए । बाकि लोगो के लिए आधा आधा रख दिया । मयूर साला उसमे से भी एक और उडा गया ।
अब जब प्रदीप लोग वापस आए । तो जबरदस्त भसड हुयी। इसी गाली गलूच ,,इसी मारा मारी,,अल्तिमेतली इसी मस्ती कि भाई ,,बस मज़ा ही आ गया ।
अब थोडी देर हमने पतंग उडाई ,,2ND YR की काटी । फिर रुक गए ।चार बजे प्रदीप और मैं नहाने की सोचे । ऊपर पानी आ नही रहा । तो नीचे सार्वजानिक टंकी (हर होस्टल में होती है ) पर जाकर नहाने की सम्भावना देखि । पानी बर्फ सा ठंडा लग रहा था ।
..अब कैसे बताऊ भाई ,,मुझे मई के महीने में नहाने से डर लगे । जनवरी में कैसे नहा लू । बुरे तरीके से फट रही थी । अब हम सोचे ..नहाये बिना गए ,,तो खाली पिली में कटवा लिया । तो फिर नहाना तो था ही ,,राम जी का नाम लेकर जैसे तैसे करके नहाये । भाई ,, नहाने का वो मज़ा ,,सिहरन का वो अहसास ,,मैं शब्दों में बयां नही कर सकता ।
..
अब फिर मनोज और में पतंग उडाने लग गए । शाम को अँधेरा होने पर (लगभग सात बजे ),,पतंग तो दिखाई नही दे रही थी,,लेकिन फिर भी उदा रहे थे ,,मयूर और प्रदीप आकर लड़ने लग गए ,,क्या मज़ा आ रहा था न भाई ,,छीन कर पतंग उडाने में (जो कि अदृश्य थी ) ..क्या कहने सुभान अल्लाह ..फिर थोडी देर बाद चरखी SE सारी डोर खाली कर के डोर तोड़ दी ,,हमारी उस अदृश्य प्यारी सी पतंग को आसमान के हवाले कर दिया ,, रक्त वर्ण के गगन में विसर्जित कर दिया ,, अदभूत आनंद की अनुभूति ..
..जारी है ..समोसों का असर ..बाकि है मेरे दोस्त..
तो इस बार कॉलेज में हर साल की तरह छुट्टी थी। सुबह दस बजे करीब उठा । अब चूँकि सात नंबर में इतना अच्छा माहोल में पिछले साल ही देख चुका था ,,और दो नंबर में वैसा मज़ा नही देखा था ,,तो देर से उठा था ।
अब जब सुबह उठा तो देखा कि सामने 2ND इयर ब्लाक से कोटा ग्रुप के मंत्री ,अभय ,,और कुछ अन्य लड़के पतंग उडा रहे थे । तब मेरे पड़ोसी प्रदीप (खेरला दौसा),,ने कहा यार ,,कहा कि यार ,, अंकुर अपन भी पतंग उडाते है । मेने कहा ..ठीक है भाई ,,इसमे क्या बुराई । लेकिन पतंग लाये कहाँ से ।
मेने कहा ,,चल कालोनी में दस दस रुपये मांगते है ,,और लेके आते है । उसने कहा ,,चल ठीक है ।
सबसे पहले , में सुभी के पास गया । पहले तो आनकानी करी । तब फिर मयूर ,,मेरे और प्रदीप के दवाब में उसने रुपये दे दिए । अब मित्तल ,,लम्बू ,,मनोज से हाथो हाथ पैसे लिए ,,और दो जूनियर को बुलवाया ।
तब तक अजय और हेमंत भी मेरे रूम पर आ गए । १०० रुपए कलेक्ट हो गए थे। अब जूनियर शकल से ***लग रहे थे ।
मेने कहा ..भाई ,,में इनके साथ जा रहा हूँ। भला इसमे किसी को क्या आपति हो सकती थी ।
..
अब हम बेक गेट गए । सारी दुकाने देखू ,,पर साली पत्नाग कंही दिखाई नही दे ।डाउट हो रहा था कि कही साली *** **** पतंग कंही मिलेगी भी या नही ।
मेने जुनिओरो को कहा ,,यार भलाई के चक्कर में बुरे फंसे ,,चलो सत्कार चलो ।
अब इसी बीच रोड पर पतंग लुट रहे बच्चो से पतंग खरीदने कि कोशिश करे । हालत ये थी कि एक भी छोरा देने को तैयार नही । बड़ी मुश्किल से ,, छोरे ने तीन रुपये में तीन पतंग दी । लगा असे जैसे जंग जित ली हो ।
अब सत्कार में जूस वाला साला ,,(अरे डोसा वाले के सामने ) डोर बच रहा था . मेने चालीस रुपये की डोर खरीद कर एक जूनियर को पकडाई । अब पतंगे वंहा नही मिली । अब मैं जुनिओरो को साफ़ साफ़ अल्टीमेटम दिया ,,कैसे भी करके ,,रोड पर लुट रहे चोरो से या ,,ख़ुद लुट कर कम से कम दस पतंग लाकर दो ।
सही कह रहा हूँ ,,भाई ,,भारी किल्लत थी । भला हो ,,जुनिओरो का जो छोरो को पकड़ पकड़ कर,,भाग भाग कर ,, पतंग लाकर दी ।
अब तक 53 रुपए खर्च हो चुके थे । मेने कहा भाई ,,चलो तुम्हारे समोसे बनते है । (दरअसल ,,में ख़ुद दस बजे उठा ,,मतलब कि नाश्ता नही किया ,,समय साधे बारह हो रहा था ,,मुझे ख़ुद को भूख लग रही थी )। समोसे खाकर ,,हम कॉलेज आ गए ।
..
अब् हमने 70 रुपए बताये । ३० रुपए बाकि थे । अब मयूर खाने पीने का शोकिन है । इवन PJ मेम भी उसे कचोरी बुलाती है । वो बोला ,,यार समोसे मंगाते है । मुझे बुरा भला प्रदीप से बीस रुपए लेकर मनोज ने एक जूनियर को तो साइकल से समोसे लाने के लिए भेज दिया ,,तो दुसरे को डोर लपटने के लिए खडा कर दिया ।
साला एसा ***** था कि ,,साले ने कभी अपनी जिन्दगी में पतंग नही उडाई थी । बस ,,समझ लो उसका तो काम हो गया ।
इसी बीच मनोज मित्तल प्रदीप मेस गए । में सुभी तायल और मयूर बेसब्री से समोसे का इंतज़ार कर रहे थे । जैसे समोसे आए ।जुनिओरो को भगा दिया हम चारो दो दो समोसे उडा गए । बाकि लोगो के लिए आधा आधा रख दिया । मयूर साला उसमे से भी एक और उडा गया ।
अब जब प्रदीप लोग वापस आए । तो जबरदस्त भसड हुयी। इसी गाली गलूच ,,इसी मारा मारी,,अल्तिमेतली इसी मस्ती कि भाई ,,बस मज़ा ही आ गया ।
अब थोडी देर हमने पतंग उडाई ,,2ND YR की काटी । फिर रुक गए ।चार बजे प्रदीप और मैं नहाने की सोचे । ऊपर पानी आ नही रहा । तो नीचे सार्वजानिक टंकी (हर होस्टल में होती है ) पर जाकर नहाने की सम्भावना देखि । पानी बर्फ सा ठंडा लग रहा था ।
..अब कैसे बताऊ भाई ,,मुझे मई के महीने में नहाने से डर लगे । जनवरी में कैसे नहा लू । बुरे तरीके से फट रही थी । अब हम सोचे ..नहाये बिना गए ,,तो खाली पिली में कटवा लिया । तो फिर नहाना तो था ही ,,राम जी का नाम लेकर जैसे तैसे करके नहाये । भाई ,, नहाने का वो मज़ा ,,सिहरन का वो अहसास ,,मैं शब्दों में बयां नही कर सकता ।
..
अब फिर मनोज और में पतंग उडाने लग गए । शाम को अँधेरा होने पर (लगभग सात बजे ),,पतंग तो दिखाई नही दे रही थी,,लेकिन फिर भी उदा रहे थे ,,मयूर और प्रदीप आकर लड़ने लग गए ,,क्या मज़ा आ रहा था न भाई ,,छीन कर पतंग उडाने में (जो कि अदृश्य थी ) ..क्या कहने सुभान अल्लाह ..फिर थोडी देर बाद चरखी SE सारी डोर खाली कर के डोर तोड़ दी ,,हमारी उस अदृश्य प्यारी सी पतंग को आसमान के हवाले कर दिया ,, रक्त वर्ण के गगन में विसर्जित कर दिया ,, अदभूत आनंद की अनुभूति ..
..जारी है ..समोसों का असर ..बाकि है मेरे दोस्त..
Wednesday, January 14, 2009
मकर संक्रांति :: कॉलेज और मेरी पतंगबाजी
अजी भाई ,,मैं बूंदी में पला बढ़ा,,तो वंहा पर 14 जनवरी को बड़े चाव से पंतंग उडाई जाती है और उससे पहले लोहडी मनाई जाती है ।
अब जबकि मैं तीन साल से जयपुर में हूँ ,,तो यंहा भी पतंगों के पीछे लोग क्रेजी है ।
..
में जब फर्स्ट इयर में था ,,तो यंहा कोई पतंगों के पीछे कोई खास माहोल नही था ।
तब में बेक गेट जाकर 5० रुपए के पतंग डोर चरखी (गिर गाड़ी) लाया था । अनुज और सोमनाथ और मेने 15 -२० पतंगे उडाई थी । बड़े मजे उडाये थे । ..तब उस साल एक दिन मैं होस्टल आठ में गार्डन पर पड़ी पतंग को उठाकर छत पर जाकर उडाने लग गया ।यंहा तक तो ठीक था ,,लेकिन तब आठ नंबर में रहने वाले सचिन बॉस (अजमेर के) ने मुझे देख लिया ,,और बुलाकर मुझे नीलेश (वही बाइक ...सांगानेर ..वाले यार) बॉस को सुपुर्द कर दिया । वो भी मेरी हिम्मत देखकर चकित थे । लेकिन मेरा तो केस बन गया था, सो ठुकना था ही ठुका भी । पर
पंतगों के शौक लिए ये कुछ भी नही था ।
..
सेकंड इयर मैं सात नंबर में रहता था ,, पास मैं पीछे एक बस्ती थी । जब फौर्थ सेम में हम घर से वापस आए ,,तो कभी कभी यंहा वंहा पतंगे पड़ी देखते ।बस जैसे चिंगारी लगने की देर थी । बस जैसे मुह मांगी मुराद पुरी हो गयी ।होना क्या था ,, बस क्लास के बाद या फिर शनिवार रविवार को जब भी कभी टाइम मिलता ,,तो क्या ,,पहुँच जाते छत पर और हो जाते शुरू ।
हम लोगो में नरेश ,,देवांशु ,,मैं ,, मोहित शुरुआती दिनों के पतंगबाज़ थे । पहले पहल तो डोर को छत पर पड़ी खाली बोतल ( u know ..kiski ) पर ही लपेटी । फिर अनुज और सीपी भी आकर उडाने लगे । उन दिनों बस दो ही काम थे -एक तो क्रिकेट और दूसरा पतंग उड़ना । तो भाई..बस डोर ले कर आ गए । पतंगे तो मैं और अनुज होस्टल से ही एकठी कर लेते थे । साली ..कॉमन रूम की छत पर पतंगे बड़ी आती थी ।
तो जैसे की मेने बताया था पीछे एक बस्ती थी ।अब भाई सर्दी का समय था(u know ..jaipur ki sardi ) ,, घर के आदमी काम पर जाते थे । घर पर नीचे औरतो को ठण्ड लगे ।तो भाई ..क्या औरते और क्या बच्चे ,,सब के सब कुछ समय छत पर जरुर आते थे । अब उनके साथ हमारी उमर की नोजवान कन्याये भी ,,कभी कभी हाँ भाई ..कभी कभी ..छत पर आती थी । मस्ती बाज तो हम पहले से थे ही ..तो बस हमरे जैसन फालतू फोकट लड़को को और चाहिए ही क्या था ,,बस हो गए शुरू ,, कुछ दिन ही सही ,,जब तक इस या उस छत पर कोई दिखती तो ,, छत पर यूँ ही पतंग के बहाने बैठे रहते ,, पतंग उनके सरो पर ले जाते तो कभी कुछ प्रतीकात्मक भाषा में संदेश प्रेषित कर देते । ये सब तो उपरोक्त लोगो की मस्ती ही थी ....लेकिन आप तो मेरा नेचर जानते ही हो ,, तो बस होना क्या था ,, हमारे कॉलेज से दूसरी गली के तीसरे मकान पर बैठी एक लड़की( नाम तो मुझे पता नही ) बस यु ही अच्छी लगती थी (अब या तो अच्छी लगेगी या अच्छी नही लगेगी ,,बुरी तो बड़े मुश्किल से लगती है ..भाई )। कहने को तो पतंग उडाने जाता था ,,पर मेरा छत पर जाने का कारन तो वो ही थी ,,शायद उसके किसी एक्साम के लिए तयारी कर रही थी ,,चूँकि हमेशा हाथ में एक किताब तो होती ही थी ,, मुझे उससे क्या ,, तो बस जब वो छत पर होती ,,तभी छत पर होता ,,वरना क्रिकेट खेलता (सात नंबर गेट के पास ..तिवाडी जी ,सीपी,जोधा ,पांडे..( भाई)..और अन्य के साथ )।
वो मुझे कभी नोटिस करे ,,तो कभी नही ,,लेकिन में जारी था ,,तो बस एसे ही समय का करवा अपनी गति से हौले हौले आगे बढ़ता गया ,,संक्रांति भी आ गयी ,, लेकिन तब तक इस रूमानी कोशिशों का कोई ख़ास सार नही निकला । उस दिन जूनियर से पतंगे मंगाई और फुल धमाल मचाया ,,रंग जमाया । सीपी अनुज देव विक्रम नरेश मोहित हेमंत मनोज और दुसरे लोगो के साथ ,,भाई कैसे बताऊ ,,उस दिन कितना मजा आया ।
उस दिन के बाद मेने भी छत पर जाना कम कर दिया । पता नही या तो अब उसके एक्साम्स चालू हो गए थे ,,या फिर दिन की हलकी गर्मी में उसने छत पर आना कर दिया था ,,या राम जाने कोई बात ,, वो अब छत पर दिखती ही नही थी । सो अब मेने छत पर जाना छोड़ दिया ,,और ये सारी कवायद बस रूमानी खिलवाड़ बनकर मेरी यादों का हिस्सा बनकर रह गयी ,,इससे ज्यादा कुछ नही । और इधर मार्केट में अपना मन लगा दिया ।(u know ..r power.. citi bank 18 th of jan )..
..
अब रही थर्ड इयर ,,यानी आज की बात ..अभी अंधेरे में पतंग उडा रहे है ,,जबकि पतंग दिखाई नही दे रही है ..मनोज प्रदीप मयूर अंकुर साथ साथ ..समय.... सात :दस ...जारी है ॥
(no doubt ..today was an historical day इन my life..
अब जबकि मैं तीन साल से जयपुर में हूँ ,,तो यंहा भी पतंगों के पीछे लोग क्रेजी है ।
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में जब फर्स्ट इयर में था ,,तो यंहा कोई पतंगों के पीछे कोई खास माहोल नही था ।
तब में बेक गेट जाकर 5० रुपए के पतंग डोर चरखी (गिर गाड़ी) लाया था । अनुज और सोमनाथ और मेने 15 -२० पतंगे उडाई थी । बड़े मजे उडाये थे । ..तब उस साल एक दिन मैं होस्टल आठ में गार्डन पर पड़ी पतंग को उठाकर छत पर जाकर उडाने लग गया ।यंहा तक तो ठीक था ,,लेकिन तब आठ नंबर में रहने वाले सचिन बॉस (अजमेर के) ने मुझे देख लिया ,,और बुलाकर मुझे नीलेश (वही बाइक ...सांगानेर ..वाले यार) बॉस को सुपुर्द कर दिया । वो भी मेरी हिम्मत देखकर चकित थे । लेकिन मेरा तो केस बन गया था, सो ठुकना था ही ठुका भी । पर
पंतगों के शौक लिए ये कुछ भी नही था ।
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सेकंड इयर मैं सात नंबर में रहता था ,, पास मैं पीछे एक बस्ती थी । जब फौर्थ सेम में हम घर से वापस आए ,,तो कभी कभी यंहा वंहा पतंगे पड़ी देखते ।बस जैसे चिंगारी लगने की देर थी । बस जैसे मुह मांगी मुराद पुरी हो गयी ।होना क्या था ,, बस क्लास के बाद या फिर शनिवार रविवार को जब भी कभी टाइम मिलता ,,तो क्या ,,पहुँच जाते छत पर और हो जाते शुरू ।
हम लोगो में नरेश ,,देवांशु ,,मैं ,, मोहित शुरुआती दिनों के पतंगबाज़ थे । पहले पहल तो डोर को छत पर पड़ी खाली बोतल ( u know ..kiski ) पर ही लपेटी । फिर अनुज और सीपी भी आकर उडाने लगे । उन दिनों बस दो ही काम थे -एक तो क्रिकेट और दूसरा पतंग उड़ना । तो भाई..बस डोर ले कर आ गए । पतंगे तो मैं और अनुज होस्टल से ही एकठी कर लेते थे । साली ..कॉमन रूम की छत पर पतंगे बड़ी आती थी ।
तो जैसे की मेने बताया था पीछे एक बस्ती थी ।अब भाई सर्दी का समय था(u know ..jaipur ki sardi ) ,, घर के आदमी काम पर जाते थे । घर पर नीचे औरतो को ठण्ड लगे ।तो भाई ..क्या औरते और क्या बच्चे ,,सब के सब कुछ समय छत पर जरुर आते थे । अब उनके साथ हमारी उमर की नोजवान कन्याये भी ,,कभी कभी हाँ भाई ..कभी कभी ..छत पर आती थी । मस्ती बाज तो हम पहले से थे ही ..तो बस हमरे जैसन फालतू फोकट लड़को को और चाहिए ही क्या था ,,बस हो गए शुरू ,, कुछ दिन ही सही ,,जब तक इस या उस छत पर कोई दिखती तो ,, छत पर यूँ ही पतंग के बहाने बैठे रहते ,, पतंग उनके सरो पर ले जाते तो कभी कुछ प्रतीकात्मक भाषा में संदेश प्रेषित कर देते । ये सब तो उपरोक्त लोगो की मस्ती ही थी ....लेकिन आप तो मेरा नेचर जानते ही हो ,, तो बस होना क्या था ,, हमारे कॉलेज से दूसरी गली के तीसरे मकान पर बैठी एक लड़की( नाम तो मुझे पता नही ) बस यु ही अच्छी लगती थी (अब या तो अच्छी लगेगी या अच्छी नही लगेगी ,,बुरी तो बड़े मुश्किल से लगती है ..भाई )। कहने को तो पतंग उडाने जाता था ,,पर मेरा छत पर जाने का कारन तो वो ही थी ,,शायद उसके किसी एक्साम के लिए तयारी कर रही थी ,,चूँकि हमेशा हाथ में एक किताब तो होती ही थी ,, मुझे उससे क्या ,, तो बस जब वो छत पर होती ,,तभी छत पर होता ,,वरना क्रिकेट खेलता (सात नंबर गेट के पास ..तिवाडी जी ,सीपी,जोधा ,पांडे..( भाई)..और अन्य के साथ )।
वो मुझे कभी नोटिस करे ,,तो कभी नही ,,लेकिन में जारी था ,,तो बस एसे ही समय का करवा अपनी गति से हौले हौले आगे बढ़ता गया ,,संक्रांति भी आ गयी ,, लेकिन तब तक इस रूमानी कोशिशों का कोई ख़ास सार नही निकला । उस दिन जूनियर से पतंगे मंगाई और फुल धमाल मचाया ,,रंग जमाया । सीपी अनुज देव विक्रम नरेश मोहित हेमंत मनोज और दुसरे लोगो के साथ ,,भाई कैसे बताऊ ,,उस दिन कितना मजा आया ।
उस दिन के बाद मेने भी छत पर जाना कम कर दिया । पता नही या तो अब उसके एक्साम्स चालू हो गए थे ,,या फिर दिन की हलकी गर्मी में उसने छत पर आना कर दिया था ,,या राम जाने कोई बात ,, वो अब छत पर दिखती ही नही थी । सो अब मेने छत पर जाना छोड़ दिया ,,और ये सारी कवायद बस रूमानी खिलवाड़ बनकर मेरी यादों का हिस्सा बनकर रह गयी ,,इससे ज्यादा कुछ नही । और इधर मार्केट में अपना मन लगा दिया ।(u know ..r power.. citi bank 18 th of jan )..
..
अब रही थर्ड इयर ,,यानी आज की बात ..अभी अंधेरे में पतंग उडा रहे है ,,जबकि पतंग दिखाई नही दे रही है ..मनोज प्रदीप मयूर अंकुर साथ साथ ..समय.... सात :दस ...जारी है ॥
(no doubt ..today was an historical day इन my life..
Saturday, January 3, 2009
Ragging ::एक यादगार अनुभव ...
हाँ भाई लोगों ..क्या यार ,,
रैगिंग की दास्ताँ बयां कर रहा हूँ ..(mn it jpr)..
भाई अपन तो साफ साफ बोले ..जिसने दी वो है जाने ..दूसरा क्या खाक जाने ..
..( i goona really miss those days :: my 1 st yr..if you are agree wid me ..tabhi padhe )..
जब मैं फर्स्ट इयर में आया था ..
डरा हुआ तो था ही ...लेकिन ये भी सोचता था कि ..ये सब दूसरो के साथ भी तो होगा ना ..
सो कभी कभी ये सोचकर दिल को दिलासा देता था ॥
वेल..मैं कॉलेज में आया ..
मेरा रूममेट ललित (lsp)केरला का था ..भाई वो ठहरा मल्लू ..उसे हिन्दी नही आवे ...और अपन अंग्रजी में जीरो थे.. तगड़ा मामला था ..तीसरा रूमी (शैलेन्द्र )तब तक डेसकी था..जैसे तैसे करके संवाद स्थापित किया ..वरना सच बोलू तो पहले लगा ..बेटा अंकुर ,,तेरी तो लग गयी ..
तो यु ही पहले दिन में अपने एक पुराने साथी के साथ ..दुसरेमाले पर बैठा हुआ था ,,,
और पहल ही दिन .. ओह भगवान् .. सीनियर्स से सामना ..
पहली बात तो ..वो गालियों से नीचे बात नही करते थे ..और पहले ही दिन ,,मुझे बजा दिया ..क्या बजाया था भाई ,,अभी तक याद है ...खैर वो तो पहला दिन था ..एक खा लिया था ..सो अब डर थोड़ा कम हो गया था ..
अगले दिन ,,गार्ड्स के साथ हम कॉलेज गए ..भाई .. वो दिन भी क्या दिन था..अभी भी ताज़ा है.
सीनियर्स ने कहा ..लाइन में चलो ..ड्रेस कोड फोल्लो करो ..gmp,,canteen ,,ccl,,backgate not allowed..बोले तो ,,लाइफ की वाट लगा रखी थी ..
जब टीचर नही होते थे .. तब क्लास में आके नचाया ,,गवाया ...और क्या क्या नही कराया ..
जब हम रस्ते में आते थे तो पूछते थे ..कन्हा से है रे .. oh .तो तू उसका बेटा है .. किसी ---garh --pur ,, (or BMG ,,MALLU ,,TAMPU ,,GULTI ) बच्चे को जानता है .. रूम पर भेज देना ..
पहले ही वीक ..2 बार back gate पर फलाना पार्क में दो बार कॉल लगी ..
उसके लिए हम लोग बहाने बना बना कर गार्ड और Caretaker को चकमा देकर बाहर जाते थे .. कॉल में सबसे LIST कन्हा है रे ..फिर नज़र तीसरे बटन पर .. नज़र उठी कि फटका पड़ा ..***** jokes याद है ..कल 5 जोके याद कर के आना ॥(जोके तो जोके होता है ..पर उनके लिए जोके २ तरह के होते थे )। भाई तुम कोई भी कहानी या जोक एक बार से शुरू नही कर सकते ..भला ये कोइ तरीका हुआ .. स्वप्न्ल prtm frz dev ghan sym sytida भी मेरे साथ ही जाते थे .. बड़ा मज़ा आता था..
पार्क में एक बार दीवार पर चढ़ कर कृष का गाना गया .. तो एक बार एक आंटी से कुत्ते का नाम भी पूछा ..तो कभी अपने count (galti) पर कोने में फटके खाए ..फिर स्कोर पर बैलेंस ..साले सीनियर .. बड़े फटके मारे ..लेकिन बाद में सोनी बेकरी पर treat भी देते थे ..(हाँ ..ये सबसे सुकून वाला पल होता था )..सीनियर्स ने एक दिन GMP पर पकड़ रखा था ..तभी साले security वाले आ धमके .. medtwl बॉस को धर लिया और फिर तो उन्हें बहुत सुनाया ..क्या हालत कर दी थी भाई ..एकदम फाड़ दी थी ..कॉलेज भी चलता रहा .. और काल्स भी ..
राखी के बाद रूम काल्स का सिलसिला ..भाई ..में लिस्ट याद करू नही .. गाना बजाना अपने को आवे नही .. ऊपर से दूसरा के ,, जोक पर हंसू अलग .. पीटना तो था ही ..कभी कारन होता था तो कभी बिना कारन ..बस .. बजा बजा के पिता गया ..पहली बार के बाद आदत हो गई थी..कॉलेज भी चलता रहा और रूम काल्स भी ..धीरे धीरे जैसे तैसे पहला सेम ख़त्म हो गया ..
जारी है ..
रैगिंग की दास्ताँ बयां कर रहा हूँ ..(mn it jpr)..
भाई अपन तो साफ साफ बोले ..जिसने दी वो है जाने ..दूसरा क्या खाक जाने ..
..( i goona really miss those days :: my 1 st yr..if you are agree wid me ..tabhi padhe )..
जब मैं फर्स्ट इयर में आया था ..
डरा हुआ तो था ही ...लेकिन ये भी सोचता था कि ..ये सब दूसरो के साथ भी तो होगा ना ..
सो कभी कभी ये सोचकर दिल को दिलासा देता था ॥
वेल..मैं कॉलेज में आया ..
मेरा रूममेट ललित (lsp)केरला का था ..भाई वो ठहरा मल्लू ..उसे हिन्दी नही आवे ...और अपन अंग्रजी में जीरो थे.. तगड़ा मामला था ..तीसरा रूमी (शैलेन्द्र )तब तक डेसकी था..जैसे तैसे करके संवाद स्थापित किया ..वरना सच बोलू तो पहले लगा ..बेटा अंकुर ,,तेरी तो लग गयी ..
तो यु ही पहले दिन में अपने एक पुराने साथी के साथ ..दुसरेमाले पर बैठा हुआ था ,,,
और पहल ही दिन .. ओह भगवान् .. सीनियर्स से सामना ..
पहली बात तो ..वो गालियों से नीचे बात नही करते थे ..और पहले ही दिन ,,मुझे बजा दिया ..क्या बजाया था भाई ,,अभी तक याद है ...खैर वो तो पहला दिन था ..एक खा लिया था ..सो अब डर थोड़ा कम हो गया था ..
अगले दिन ,,गार्ड्स के साथ हम कॉलेज गए ..भाई .. वो दिन भी क्या दिन था..अभी भी ताज़ा है.
सीनियर्स ने कहा ..लाइन में चलो ..ड्रेस कोड फोल्लो करो ..gmp,,canteen ,,ccl,,backgate not allowed..बोले तो ,,लाइफ की वाट लगा रखी थी ..
जब टीचर नही होते थे .. तब क्लास में आके नचाया ,,गवाया ...और क्या क्या नही कराया ..
जब हम रस्ते में आते थे तो पूछते थे ..कन्हा से है रे .. oh .तो तू उसका बेटा है .. किसी ---garh --pur ,, (or BMG ,,MALLU ,,TAMPU ,,GULTI ) बच्चे को जानता है .. रूम पर भेज देना ..
पहले ही वीक ..2 बार back gate पर फलाना पार्क में दो बार कॉल लगी ..
उसके लिए हम लोग बहाने बना बना कर गार्ड और Caretaker को चकमा देकर बाहर जाते थे .. कॉल में सबसे LIST कन्हा है रे ..फिर नज़र तीसरे बटन पर .. नज़र उठी कि फटका पड़ा ..***** jokes याद है ..कल 5 जोके याद कर के आना ॥(जोके तो जोके होता है ..पर उनके लिए जोके २ तरह के होते थे )। भाई तुम कोई भी कहानी या जोक एक बार से शुरू नही कर सकते ..भला ये कोइ तरीका हुआ .. स्वप्न्ल prtm frz dev ghan sym sytida भी मेरे साथ ही जाते थे .. बड़ा मज़ा आता था..
पार्क में एक बार दीवार पर चढ़ कर कृष का गाना गया .. तो एक बार एक आंटी से कुत्ते का नाम भी पूछा ..तो कभी अपने count (galti) पर कोने में फटके खाए ..फिर स्कोर पर बैलेंस ..साले सीनियर .. बड़े फटके मारे ..लेकिन बाद में सोनी बेकरी पर treat भी देते थे ..(हाँ ..ये सबसे सुकून वाला पल होता था )..सीनियर्स ने एक दिन GMP पर पकड़ रखा था ..तभी साले security वाले आ धमके .. medtwl बॉस को धर लिया और फिर तो उन्हें बहुत सुनाया ..क्या हालत कर दी थी भाई ..एकदम फाड़ दी थी ..कॉलेज भी चलता रहा .. और काल्स भी ..
राखी के बाद रूम काल्स का सिलसिला ..भाई ..में लिस्ट याद करू नही .. गाना बजाना अपने को आवे नही .. ऊपर से दूसरा के ,, जोक पर हंसू अलग .. पीटना तो था ही ..कभी कारन होता था तो कभी बिना कारन ..बस .. बजा बजा के पिता गया ..पहली बार के बाद आदत हो गई थी..कॉलेज भी चलता रहा और रूम काल्स भी ..धीरे धीरे जैसे तैसे पहला सेम ख़त्म हो गया ..
जारी है ..
Friday, January 2, 2009
MY FIRST YR :: MY BATCH
मेरा पहला साल .... कॉलेज..मेरा बेच ..
..
जब में पहली बार क्लास गया था ,,,तुम्हारी कसम भाई ,,क्या बताऊ ,,टीचर लोग आकर अंग्रेज़ी में बकबक करे अपनी अंग्रेज़ी पहले से ही जीरो थी ,, तो समझ में क्या खाक आता ,(चूंकि अपन ठहरे हिन्दी भाषी छेत्र के हिन्दी के विद्यार्थी .) पहले दिन टाइम काटने के अलावा कुछ खास नही किया ..समीप में अशोक और नेमी भी मेरी हालत में ही थे .. तो थोडी हिम्मत आई की.. भाई ..अपन यहाँ अकेले नही है ।
धीरे धीरे कोशिश की ..और अपनी अभी यांत्रिकी की यात्रा बस शुरू हो गयी ..
अब सच कहू तो बड़े अजीब टीचर थे । एक थे कौल सर ..पता नही क्या बोलते और क्या पढ़ते थे । ak vyaaas सर तो जो पढाये ,, केवल वो ही जाने । फिजिक्स और सी लैंगुएज के टीचरों ने तो दर्शन ही मुश्किल से देते थे ।
खैर ,,बाकि बेच बड़ा मस्त था । मस्ती के अलावा किसी को और कुछ सूझता नही ।
aieee के नियमानुसार हमारे कॉलेज में तब हर राज्य के लिए सीट्स आरक्षित थी सब लड़के नए तो थे ही ,,अपना अपना एक फ्रेंड सर्कल बना लिए थे ।
मींजी ,सुधीर, संभ्रांत और कुछ अन्य को जैसे क्लास से मतलब ही नही ही होता था । उनकी अपनी ही दुनिया थी ।
कुछ लोग सीसी (one who is ....for a girl ,,this term is very common in my college ) टाइप के भी थे ।
तो कुछ पढाकू भी थे । या यूँ कंहू कि.....किसी आम क्लास की तरह हमारी क्लास भी सब तरह के लोगों से भरी थी ।
..
क्लास लेने के मामले मैं बह्पन से ही बड़ा लेट लतीफ़ रहा हूँ । तो ऐसे ही मैं पहले ही दिन फिजिक्स लैब में लेट पहुँचा । अब f2 ( f2 was my sab batch ..actually my batch was further divided in 4 sab batches ) में उस दिन लैब पार्टनर बनाये गए थे ,,तो एक ही लड़की (जयंती:: परिवर्तित नाम) थी ,, और में सबसे लेट था ,,तो वो मेरी लैब पार्टनर बना दी गयी । ..यंहा तक तो कोई खास बात नही..लेकिन मोनी और अनुज जैसे खुराफाती लड़कों ने अपने मन से कुछ बातें बनाकर फैला दी ..और फिर तो क्या आप भी जानते है ..बस लड़को को कोई बकरा मिलना चाहिए आते जाते ,,मुझे जयंती के नाम से बुलाते ,, चिढाते ,,कुल मिला कर मस्ती करते । आज भी उन कमेंट्स को याद कर बस यूँ ही कभी कभी हसी आ जाती है ।
..
हमारे यंहा परीक्षा तीन पार्ट्स में होती है .. फर्स्ट मिड टर्म ,,सेकंड मिड टर्म और लास्ट एंडटर्म ।
अब शुरुँआत में तो पढ़े नही( i have told you reason ,,see in start ) ,,तो तत्कालीन भूत के सबसे ख़राब मार्क्स थे । तब तक घर की याद मन से गयी नही थी ,, रागिंग होती थी वो अलग ,,तो सोचा करता था ..अपने गृहनगर में किसी कॉलेज में प्रवेश ले लू ,,और पराये से जयपुर को छोड़ दू ।
किसी तरह से मन लगाया. .अगले मिड टर्म में एक नया नुस्खा हाथ लगा चित्तिंग का ।
श्याम मेरा होस्टल का साथी था । वो और में ,,पेपर होने से पहले ही ,,बोर्ड पर ( हमारे पेपर करीब तीन बाय तीन के लकड़ी के बोर्ड पर होते थे ) जाकर लगभग सारे फोर्मुले आदि लिख देते थे,, बीच पेपर में आंसर भी मिलाते थे ।
एंड टर्म में भी यही कहानी दोहराई । तो बस होना क्या था ,,परिणाम अप्रत्याशित रूप से चोंकाने वाले थे ।
पहले मिड टर्म में बहुत बुरे स्कोर के बावजूद मेरा प्रदशन कुल मिलाकर बहुत अच्छा था ,,nine pointer के रूप में फेमस हुआ और क्लास में चौथा स्थान था। (बड़ा नाटकीय सेम था )।
..
दूसरा सेम भी मार्क्स के मामले में ऐसा ही था । दुसरे सेम की खास बात यह थी ..इस सेम में सबसे कम पढ़ाई हुई । क्लास कम होती थी ,,लैब तो हमने ही नही करी . .. कुल मिलाकर बड़ी मस्ती करी ,,और फर्जी सेम था ।
भावना मेम हमारी फिजिक्स की क्लास लेती थी । वो नयी थी ,, अब पहली बात तो ये कि वो जो भी बोले पढाये,,वो सब का सब हमारे उपर से जाए । उपर से खुराफाती बच्चों पर उनका ज़ोर चले नही ।
आगे की दो रो (पंक्तिया )खाली । सब के सब क्लास वाले पीछे आकर बैठ गए ..और फुल मस्ती करे ।
जब कोई उनकी सुने नही,, तो वो में भरी क्लास में फुट फुट कर रो दी । और रोते रोते ,,सिसकिया लेते हुए ,,अपनी व्यथा सुनाने लगी । सब के सब सकते में ,,कि भाई ,,ये क्या हुआ । सही में बड़ी सही घटना थी ,, लेकिन हम मस्तानो पर इस घटना का असर भला कब तक रहता ,, दो दिन तक शांत रहे , फिर वही मस्ती चालू । लेकिन ,,तब तक मेम ने एडजस्ट करना सिख लिया था ।
एक सर थे हाँ याद आया ..मित्तल सर ,, भाई क्या सर थे यार ,,पुरे सेम जब भी उनकी क्लास करी सिर्फ़ और सिर्फ़ एक कम किया ,,नींद निकालने का (हालाँकि वो क्लास में नींद का आनंद उठाने का पहला अनुभव था,, लेकिन अब तो बस जैसे आदत सी हो गयी है )। इसमे उनका भी कोई दोष नही था ,, क्यूंकि दोपहर में खाने के बाद अगर क्लास होगी ,,तो भला लड़के क्या करे ।
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चूँकि ये साल मेरा कॉलेज का पहला साल था ,,कही अनकही ढेरो यादे है । हम साथियो के लिए ये यादे अनमोल धरोहर है ...शब्दों में बयाँ नही की जा सकती ,,बस महसूस की जा सकती है ... ...
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जब में पहली बार क्लास गया था ,,,तुम्हारी कसम भाई ,,क्या बताऊ ,,टीचर लोग आकर अंग्रेज़ी में बकबक करे अपनी अंग्रेज़ी पहले से ही जीरो थी ,, तो समझ में क्या खाक आता ,(चूंकि अपन ठहरे हिन्दी भाषी छेत्र के हिन्दी के विद्यार्थी .) पहले दिन टाइम काटने के अलावा कुछ खास नही किया ..समीप में अशोक और नेमी भी मेरी हालत में ही थे .. तो थोडी हिम्मत आई की.. भाई ..अपन यहाँ अकेले नही है ।
धीरे धीरे कोशिश की ..और अपनी अभी यांत्रिकी की यात्रा बस शुरू हो गयी ..
अब सच कहू तो बड़े अजीब टीचर थे । एक थे कौल सर ..पता नही क्या बोलते और क्या पढ़ते थे । ak vyaaas सर तो जो पढाये ,, केवल वो ही जाने । फिजिक्स और सी लैंगुएज के टीचरों ने तो दर्शन ही मुश्किल से देते थे ।
खैर ,,बाकि बेच बड़ा मस्त था । मस्ती के अलावा किसी को और कुछ सूझता नही ।
aieee के नियमानुसार हमारे कॉलेज में तब हर राज्य के लिए सीट्स आरक्षित थी सब लड़के नए तो थे ही ,,अपना अपना एक फ्रेंड सर्कल बना लिए थे ।
मींजी ,सुधीर, संभ्रांत और कुछ अन्य को जैसे क्लास से मतलब ही नही ही होता था । उनकी अपनी ही दुनिया थी ।
कुछ लोग सीसी (one who is ....for a girl ,,this term is very common in my college ) टाइप के भी थे ।
तो कुछ पढाकू भी थे । या यूँ कंहू कि.....किसी आम क्लास की तरह हमारी क्लास भी सब तरह के लोगों से भरी थी ।
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क्लास लेने के मामले मैं बह्पन से ही बड़ा लेट लतीफ़ रहा हूँ । तो ऐसे ही मैं पहले ही दिन फिजिक्स लैब में लेट पहुँचा । अब f2 ( f2 was my sab batch ..actually my batch was further divided in 4 sab batches ) में उस दिन लैब पार्टनर बनाये गए थे ,,तो एक ही लड़की (जयंती:: परिवर्तित नाम) थी ,, और में सबसे लेट था ,,तो वो मेरी लैब पार्टनर बना दी गयी । ..यंहा तक तो कोई खास बात नही..लेकिन मोनी और अनुज जैसे खुराफाती लड़कों ने अपने मन से कुछ बातें बनाकर फैला दी ..और फिर तो क्या आप भी जानते है ..बस लड़को को कोई बकरा मिलना चाहिए आते जाते ,,मुझे जयंती के नाम से बुलाते ,, चिढाते ,,कुल मिला कर मस्ती करते । आज भी उन कमेंट्स को याद कर बस यूँ ही कभी कभी हसी आ जाती है ।
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हमारे यंहा परीक्षा तीन पार्ट्स में होती है .. फर्स्ट मिड टर्म ,,सेकंड मिड टर्म और लास्ट एंडटर्म ।
अब शुरुँआत में तो पढ़े नही( i have told you reason ,,see in start ) ,,तो तत्कालीन भूत के सबसे ख़राब मार्क्स थे । तब तक घर की याद मन से गयी नही थी ,, रागिंग होती थी वो अलग ,,तो सोचा करता था ..अपने गृहनगर में किसी कॉलेज में प्रवेश ले लू ,,और पराये से जयपुर को छोड़ दू ।
किसी तरह से मन लगाया. .अगले मिड टर्म में एक नया नुस्खा हाथ लगा चित्तिंग का ।
श्याम मेरा होस्टल का साथी था । वो और में ,,पेपर होने से पहले ही ,,बोर्ड पर ( हमारे पेपर करीब तीन बाय तीन के लकड़ी के बोर्ड पर होते थे ) जाकर लगभग सारे फोर्मुले आदि लिख देते थे,, बीच पेपर में आंसर भी मिलाते थे ।
एंड टर्म में भी यही कहानी दोहराई । तो बस होना क्या था ,,परिणाम अप्रत्याशित रूप से चोंकाने वाले थे ।
पहले मिड टर्म में बहुत बुरे स्कोर के बावजूद मेरा प्रदशन कुल मिलाकर बहुत अच्छा था ,,nine pointer के रूप में फेमस हुआ और क्लास में चौथा स्थान था। (बड़ा नाटकीय सेम था )।
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दूसरा सेम भी मार्क्स के मामले में ऐसा ही था । दुसरे सेम की खास बात यह थी ..इस सेम में सबसे कम पढ़ाई हुई । क्लास कम होती थी ,,लैब तो हमने ही नही करी . .. कुल मिलाकर बड़ी मस्ती करी ,,और फर्जी सेम था ।
भावना मेम हमारी फिजिक्स की क्लास लेती थी । वो नयी थी ,, अब पहली बात तो ये कि वो जो भी बोले पढाये,,वो सब का सब हमारे उपर से जाए । उपर से खुराफाती बच्चों पर उनका ज़ोर चले नही ।
आगे की दो रो (पंक्तिया )खाली । सब के सब क्लास वाले पीछे आकर बैठ गए ..और फुल मस्ती करे ।
जब कोई उनकी सुने नही,, तो वो में भरी क्लास में फुट फुट कर रो दी । और रोते रोते ,,सिसकिया लेते हुए ,,अपनी व्यथा सुनाने लगी । सब के सब सकते में ,,कि भाई ,,ये क्या हुआ । सही में बड़ी सही घटना थी ,, लेकिन हम मस्तानो पर इस घटना का असर भला कब तक रहता ,, दो दिन तक शांत रहे , फिर वही मस्ती चालू । लेकिन ,,तब तक मेम ने एडजस्ट करना सिख लिया था ।
एक सर थे हाँ याद आया ..मित्तल सर ,, भाई क्या सर थे यार ,,पुरे सेम जब भी उनकी क्लास करी सिर्फ़ और सिर्फ़ एक कम किया ,,नींद निकालने का (हालाँकि वो क्लास में नींद का आनंद उठाने का पहला अनुभव था,, लेकिन अब तो बस जैसे आदत सी हो गयी है )। इसमे उनका भी कोई दोष नही था ,, क्यूंकि दोपहर में खाने के बाद अगर क्लास होगी ,,तो भला लड़के क्या करे ।
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चूँकि ये साल मेरा कॉलेज का पहला साल था ,,कही अनकही ढेरो यादे है । हम साथियो के लिए ये यादे अनमोल धरोहर है ...शब्दों में बयाँ नही की जा सकती ,,बस महसूस की जा सकती है ... ...
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