तो जैसे की मैंने आपको बताया था कि में मन में डर लेके कॉलेज में पिताजी के साथ आया था । अब पिताजी तो कुछ घंटो के बाद बूंदी (मेरा सिटी ) चले गए । अब में अपने हॉस्टल में अपने रूम २ ७३ में अकेला था ॥ अब पास के कमरों वालों से मिला ॥
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शाम को मेरा एक रूम mate ललित आया । वो केरल से था ॥
में ठहरा पुरी तरह से हिन्दी भाषी ..और वो जैसे अंग्रेज का छोटा भाई ॥ भइया अपनी तो वाट लग गई थी।
खैर ..जैसे तैसे उससे बात करता था । तीसरा रूम मेट था शैली (लड़का है भाई ..लड़की मत समझना )। वो कुछ समय के लिए deski बना हुआ था . पड़ोस में आदि , विनय KV अभिषेक अक्षय रहते थे ।
शाम को रोज अत्तेंड नेस होती थी । जन्हाँ हम सब हॉस्टल वाले मिलते थे। बड़ी मस्ती करते थे । तो इस तरह मेरा फर्स्ट इयर हॉस्टल में चालू हुआ ।
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सितेम्बर में मेरे पड़ोसी addy का बर्थडे था। हमे थडी या सरस allow तो था नही .
तो उसने अच प्लान बनाया था । शाम को हमने उसे खूब gpl (it is one of kind of laat which is given at the time ,,when you have an occasion of happyness ) मारी । उसके बाद उसने हमे treat दी। वो कुरकुरे केक कोल्ड ड्रिंक आदि खाने के सामान लाया था । उसके बाद verma KT nics को पता नही क्या सूझा कि वो लोग पानी की बाल्टी भरकर लाये .और सितेम्बर में होली खेलना चालू कर दिया । एक दुसरे पर पानी फेकना ,,एक दुसरे को पीटना मारना चालू कर दिया । इधर उधर भागे ..पानी फेका ..खूब मस्ती करी । शैली को अगले दिन बुखार आ गया । लेकिन उस दिन बड़ा मज़ा आया ।( क्या बताऊँ भाई वो दिन आज भी याद आता है )।..
. हमारी मेस में मेरे दो सीनियर भी (३ इयर) आते थे ।एक उनमे से कूल था । लेकिन दूसरा (नील बॉस ) सवाल जवाब करते और जबर्दस्ती का मुझे हरामी और फट्टेबाज़ बताते । एक दिन उन्होंने किसी बात पर हॉस्टल ग्राउंड में मुझे तमाचा जड़ दिया । आस पास कुछ साथी खड़े थे । साला ..तब मुझे बड़ा बुरा लगा .मन तो किया कि दूँ एक जवाब में ..लेकिन मन मसोस कर रह गया। (क्या बताऊँ भाई वो दिन आज भी याद आता है)।
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tyl और निक्स रूम मेट थे । किसी कारन से निक्स के पास चाबी नही थी । वो रूम में ही पड़ी हुई थी ॥ रूम की खिड़की खुली हुई थी . उसने खूब try करी .लेकिन कामयाब नही हुआ । तो उसने मुझे कहा की भाई बाहर आ एक काम है । में बाहर गया ,तो उसने मुझे खिड़की के नीचे से एक फीट चौडी जगह से अंडर जाने को कहा । मेने कहा में कसी जा सकता हूँ । तो उसने कहा भाई कोशिश कर के देख ले। मदद कर दे यार ..मेने कहा ठीक है । कोशिश करने में अपना क्या जाता है । उस दिन में हमारी खिड़कियों के नीचे के एक छोटे सी जगह से अंडर घुसा . बहुत मुस्किल हो रही थी में हवा में लटका हुआ था और साला निक्स मुझे धक्का दे रहा था . किसी तरह में अंडर घुसा और निक्स को चाबी लाकर दी । (क्या बताऊँ भाई वो दिन आज भी याद आता है)
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जारी है

3 comments:
अफ़साने बहुत हैं सरे राह चलते चलते.
पढ़ा बहुत, अलबत्ता कॉलेज की पढ़ाई नसीब न हुई ..
सुलभ पत्र
kitna achha lagta hai ..
jab aap kuch prayas kare ..aur aap par koi comment kare ..
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ji .. dhanyawad
bahut achchha hai aur likho.
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